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Showing posts from September, 2020

हिंदू देवांमधल्या प्रमुख जाती

हिंदू देवांमधल्या प्रमुख जाती इतर भाषांत वाचा पहारा संपादन करा हिंदू धर्म  हा अपौरुषेय धर्म आहे, म्हणजे त्याची स्थापना कोणत्याही माणसाने केलेली नाही असे मानल्या जाते. त्यामुळे तो साधनदोष (errors of instrument) आणि अभिज्ञान (cognition) यांपासून मुक्त आहे. त्यामुळे वेदग्रंथ व उपनिषदे, ब्रह्मसूत्रे आणि भगवद्गीता नसती तरी हिंदूधर्म राहिलाच असता. हिंदू देव हे शाश्वत, अविनाशी आणि अमर आहेत. हिंदू देव लढाया करीत असले तरी ते अन्यायाची बाजू घेत नाहीत. ते ग्रीक आणि रोमन देवांप्रमाणे एखाद्या माणसाचा द्वेष करीत नाहीत. ते आपापसात भांडत नाहीत, एकमेकांचा मत्सर करीत नाहीत. अनेक हिंदू देव ही निसर्गातील विविध शक्तींची आणि सृष्टीतील विविध बाबींची रूपे आहेत. या हिंदू देवांमध्ये अनेक जाती आहेत. त्यांची जातिनुसार उतरंडही आहे.  [  संदर्भ हवा  ] देवांमधल्या प्रमुख जाती आणि त्यांतील देव संपादन करा वैदिक देव आणि देवता : अग्नी, अदिती, अरण्यानी,  इंद्र , उषा,  का , कुहू,  गायत्री , दिती, पृष्णी,  बृहस्पती , भू, मरुत,  यम ,  वरुण , वायु,  विश्वकर्मा , राका,...

देवांची वाहने

देवांची वाहने हिंदुधर्मात ३३ कोटी देव मानले गेले आहेत. काहींच्या मते ३३ कोटी म्हणजे ३३ प्रकारचे देव. या ३३ कोटी देवांपैकी बहुसंख्य देव इकडून तिकडे हिंडत नसले तरी या देवांना स्वतःची वाहने आहेत. इतर प्राण्यांसह गाढव, खेकडा, विंचू, घोरपड, शेळी ही देखील काही देवतांची वाहने आहेत. खालील यादीत यांपैकी काही देवांची वाहने दिली आहेत. अग्नी - बकरा इंद्र - ऐरावत (आठ सोंडा असलेला हत्ती); उच्चैःश्रवा नावाच्या घोड्याने ओढलेला रथ इंद्राणी (सप्तमातृकांतील एक) - हत्ती इक्षुमती - मगर कामदेव - पोपट कामाख्या - साप कार्तिकस्वामी -  मोर कुबेर - मनुष्य केतू - गिधाड कौमारी (सप्तमातृकांतील एक) - मोर गंगा - मगर गणपती - उंदीर चामुंडा (सप्तमातृकांतील एक) - प्रेत; किंवा शृगाल, कुत्रा वा घुबड. तारिणी देवी - बदक दुर्गा - वाघ; सिंह; हत्ती पार्वती - शिवाजवळ असताना कमळ ; स्वतंत्र मूर्तीत असताना गोधा ( घोरपड ) (आधार - ‘रूपमंडन’ ग्रंथ) बहुचरा देवी - कोंबडा ब्रह्मदेव - हंस ब्राह्मी (सप्तमातृकांतील एक) - हंस भ्रामरंबा - कीटक भल्लुका - अस्वल (भल्लुक म्हणजे अस्वल!) माहेश्वरी ((सप्तमातृकांतील एक) - बैल यम - रेडा यमुना...

बैल (पौराणिक मान्यता)

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बैल (पौराणिक मान्यता) किसी अन्य भाषा में पढ़ें ध्यान रखें संपादित करें प्राचीन विश्व के दौरान  पवित्र बैल  की पूजा पश्चिमी विश्व की स्वर्ण बछड़े की प्रतिमा से सम्बंधित  बाइबिल के  प्रसंग में सर्वाधिक समानता रखती है, यह प्रतिमा पर्वत की चोटी के भ्रमण के दौरान यहूदी संत मोसेज़ द्वारा पीछे छोड़ दिए गए लोगों द्वारा बनायी गयी थी और सिनाइ ( एक्सोडस ) के निर्जन प्रदेश में यहूदियों द्वारा इसकी पूजा की जाती थी। मर्दुक "उटू का बैल" कहा जाता है। भगवान  शिव  की सवारी नंदी, भी एक बैल है। वृषभ राशि का प्रतीक भी पवित्र बैल है। बैल मेसोपोटामिया और मिस्र के समान चन्द्र संबंधी हो या भारत के समान सूर्य संबंधी हो, अन्य अनेकों  धार्मिक  और सांस्कृतिक अवतारों का आधार होता है और साथ ही साथ नवयुग की संस्कृति में आधुनिक लोगो की चर्चा में होता है। अंकारा में ऐनाटोलियन सभ्यताओं के संग्रहालय में कैटलहोयुक से बैल का सिर खोदकर निकाला गया। नंदी बैल की द्वितीय शताब्दी ईसवी की मूर्ति. पाषाण युग संपादित करें कई में कई पुरापाषाणयुगीन यूरोपीय गुफा चित्रों में औरौक्स (एक प्रकार का जा...

जलेश्वर महादेव; अद्भुत है भगवान शिव का 5000 वर्ष पुराना अस्तित्व का प्रतीक...!!! |

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जलेश्वर महादेव; अद्भुत है भगवान शिव का 5000 वर्ष पुराना अस्तित्व का प्रतीक...!!! | babamahakaal भारतीय पौराणिक कथा(Indian Mythological Stories) हिन्दू धर्म में बहुत से देवी देवता हैं जिनमें से  ब्रम्हा (Brahma),  विष्णु (Vishnu) और  महेश (Mahesh) प्रमुख हैं। इन सभी देवताओं का अपना अलग-अलग महत्व है। जिसमें महादेव(Mahadev) को कई नामों से जाना जाता है एक नाम इनका  महाकाल (Mahakaal) भी है। जिसके कारण इन्हें विनाश का देवता भी माना जाता है। महादेव भगवान शिव(Shiv) को देवों का देव माना जाता है, वे सृष्टि के निर्माण के समय प्रकट हुए थे। भगवान शिव(Shiv) का ध्यान करने से ही एक ऐसी छवि उभरती है जिसमें वैराग है। महादेव(Mahadev) के हाथ में त्रिशूल, वहीं दूसरे हाथ में डमरु, गले में सांप और सिर पर त्रिपुंड चंदन लगा हुआ है। भगवान शिव(Shiv) सभी बुराइयों का अंत करके पुनः नवनिर्माण करते हैं।वे अपने क्रोध के कारण विनाशकारी भी माने जाते हैं ।लेकिन वो नवनिर्माण के देवता माने जाते हैं। सभी देवों के ऊपर उन्हें माना जाता है। बुराई की वृद्धि होती है वो पूरी सृष्टि समाप्त कर देते हैं जिससे नए य...

रावण जैसा महाज्ञानी दूसरा कोई नहीं;

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रावण जैसा महाज्ञानी दूसरा कोई नहीं;पढ़िए रावण की अच्छाइयां जिसको शायद कोई न जानता हो..!!! deepika gupta  |  September 28, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य |  2 Comments नवरात्री के 9 दिनों के बाद 10वें दिन विजयादशमी का पर्व आता है जिस दिन भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी आज जिस रावण को हम बुराई की नजर से देखती है उनके जैसा महँ ज्ञानी कोई नहीं होगा उनके अंदर कुछ अच्छी बातें भी थी जिसके प्रमाण हमको शास्त्रों में मिलते है। लंकापति रावण एक पंडित के पुत्र थे इसलिए वे चारों वेदों का ज्ञान रखते थे और महापंडित भी कहलाते थे । रावण ने माँ सीता को रखा अशोक वाटिका में आइये अब जानते है रावण की कुछ अच्छाइयाँ जिनसे शायद आप भी अनजान हो । रावण अहंकारी थे और उनको समस्त लोको पर अपनी सत्ता जमानी थी लेकिन वे सबसे बड़ा शिवभक्त भी थे । उस समय में भगवान शिव का कोई सच्चा भक्त था तो वह सिर्फ रावण क्योंकि आज हम जो शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करते है वह रावण की ही देन है। बता दें जब श्री राम वानरों के साथ लंका विजय के लिए निकले तभी रामेश्वरम में उनको विजय यज्ञ करना था जिसके लिए देवताओं के गुरु...

जब माँ सती ने महादेव को बताया अपने विकराल रूप में रहने वाले 10 रूपों के बारे में..!!!

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पढ़िए वो प्रसंग; जब माँ सती ने महादेव को बताया अपने विकराल रूप में रहने वाले 10 रूपों के बारे में..!!! deepika gupta  |  September 28, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य , हिंदू देवी देवता  |  2 Comments इस समय मां दुर्गा का पावन पर्व शारदीय नवरात्री चल रहा है ये तो आप जानते ही है माँ ने कई बार जन्म लिया था । बता दें माँ दुर्गा के सभी जन्मों में से दो जन्मों की कथाएं ज्यादा प्रसिद्ध हैं। पहला, जब उन्होंने राजा दक्ष के यहां सती के रूप में जन्म लिया था । दूसरा, जब उन्होंने पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया, तब वे पार्वती कहलाईं। माँ सती का विकराल रूप आज हम बात करेंगे माँ सती के बारे में । सती के पिता दक्ष प्रजापति ब्रह्मा के पुत्र थे। उनकी दत्तक पुत्री थीं सती, जिन्होंने तपस्या करके शिव को अपना पति बनाया, लेकिन शिव की जीवनशैली दक्ष को बिलकुल ही नापसंद थी। शिव और सती का अत्यंत सुखी दांपत्य जीवन था। एक बार दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ का आयोजन किया जिसमें शिव और सती को छोड़कर सभी देवी-देवताओं को निमंत्रित किया। जब सती को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने उस यज्ञ में ज...

क्या आप जानते है भगवान शिव के 10 रुद्रावतार;नहीं तो जरूर पढ़ें..!!!!

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क्या आप जानते है भगवान शिव के 10 रुद्रावतार;नहीं तो जरूर पढ़ें..!!!! deepika gupta  |  October 9, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य ,  बाबा महाकाल ,  हिंदू देवी देवता  |  1 Comment भगवान शिव जगत के संहारक के रूप में माने जाते है, वे संहार के देवता और कल्याणकारी हैं। ।उनके अवतार जैसे हनुमान, अश्वत्थामा, दुर्वासा, पिप्पलाद, वृषभ आदि सभी के बारे में तो अपने सुना ही होगा, शिव के सभी प्रमुख अवतार व्यक्ति को सुख, समृद्धि, भोग, मोक्ष प्रदान करने वाले एवं भगवान शिव के 10 रुद्रावतार व्यक्ति की रक्षा करने वाले हैं।आज यहां हम आपको शिव के दस रुद्रावतार के बारे में बताने जा रहे है ।तो आइये जानते है महाकाल- शिव के 10 प्रमुख अवतारों में पहला अवतार महाकाल को माना जाता है। इस अवतार की शक्ति मां महाकाली मानी जाती हैं। उज्जैन में महाकाल नाम से ज्योतिर्लिंग विख्यात है।उज्जैन में ही गढ़कालिका क्षेत्र में मां कालिका का प्राचीन मंदिर है और महाकाली का मंदिर गुजरात के पावागढ़ में है। भगवान शिव तारा- शिव के रुद्रावतार में दूसरा अवतार तार (तारा) नाम से प्रसिद्ध है। इस अवतार की शक्ति...

यह दैत्य नहीं होता तो माँ का नाम " दुर्गा " नहीं होता जानिये सीधे दुर्गा सप्तशती की कथा से ...... |

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यह दैत्य नहीं होता तो माँ का नाम " दुर्गा " नहीं होता जानिये सीधे दुर्गा सप्तशती की कथा से ...... | babamahakaal हमारे हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं से जुड़े कई तथ्य होते है कई कहानियां होती है भगवान के नाम से जुड़ी कथा काफी प्रचलित होती है। आज हम बता रहें है कि मां दुर्गा जिन्हें मां काली के नाम से भी जाना जाता है, उनका नाम ‘दुर्गा’ कैसे पड़ा। इस सन्दर्भ में श्री दुर्गा सप्तशती में वर्णित एक कथा के अनुसार एक दुष्ट प्राणी पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् दुर्गा माँ ही देवी को दुर्गा नाम से बुलाया गया। यह तब की बात है जब प्रह्लाद के वंश में दुर्गम नाम का एक अति भयानक, क्रूर और पराक्रमी दैत्य पैदा हुआ। इस दैत्य के जीवन का एक ही मकसद था – सभी देवी-देवताओं को पराजित कर समस्त सृष्टि पर राज करना। लेकिन जब तक महान देवता इस दुनिया में मौजूद थे, तब तक दुर्गम के लिए यह करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी था।अपनी सूझ-बूझ से दुर्गम ने यह पता लगा लिया था कि जब तक देवताओं के पास महान वेदों का बल है, तब तक वह उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकेगा। इसलिए उसने माँ दुर्गा उन देवों को हड़पने की योजना बनाई। उस...

आज जानिये किस तरह से नंदी बने भगवान शिव के वाहन !!

आज जानिये किस तरह से नंदी बने भगवान शिव के वाहन !! एक समय था , जब भगवान शिव के पास कोई वाहन न था। उन्हें पैदल ही जंगल-पर्वत की यात्रा करनी पड़ती थी। एक दिन माँ पार्वती उनसे बोलीं,‘आप तो संसार के स्वामी हैं। क्या आपको पैदल यात्रा करना शोभा देता है?’ शिव जी हँसकर बोले-‘देवी,हम तो रमते जोगी है। हमें वाहन से क्या लेना-देना? भला साधु भी कभी सवारी करते हैं?’ शिव जी ने उन्हें बार-बार समझाया परंतु वह जिद पर अड़ी रही। बिना किसी सुविधा के जंगल में रहना पार्वती को स्वीकार था परंतु वह शिवजी के लिए सवारी चाहती थीं।अब भोले भंडारी चिंतित हुए। भला वाहन किसे बनाएँ। उन्होंने देवताओं को बुलवा भेजा। नारदमुनि ने सभी देवों तक उनका संदेश पहुँचाया। सभी देवता घबरा गए। कहीं हमारे वाहन न ले लें। सभी कोई-न-कोई बहाना बनाकर अपने-अपने महलों में बैठे रहे। पार्वती उदास थीं। शिवजी ने देखा कि कोई देवता नहीं पहुँचा। उन्होंने एक हुंकार लगाई तो जंगल के सभी जंगली जानवर आ पहुँचे। ‘तुम्हारी माँ पार्वती चाहती है कि मेरे पास कोई वाहन होना चाहिए। बोलो कौन बनेगा मेरा वाहन?’ सभी जानवर खुशी से झूम उठे।  सभी जानवर अपनी अपनी...

कैसे आयी महाकाल की जटाओ में गंगा …..

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कैसे आयी महाकाल की जटाओ में गंगा ….. Admin  |  January 9, 2017  |  अविश्वसनीय रहस्य ,  सनातन धर्म  |  No Comments जब गंगा को जटाओं में बांध लिया शिव ने रघुवंश में भगवान राम के पूर्वज भागीरथ एक प्रतापी राजा थे। उन्होंने अपने पूर्वजों को जीवन-मरण के दोष से मुक्त करने के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाने की ठानी। उन्होंने कठोर तपस्या आरम्भ की। गंगा उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं तथा स्वर्ग से पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हो गईं। पर उन्होंने भागीरथ से कहा कि यदि वे सीधे स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरेंगीं तो पृथ्वी उनका वेग सहन नहीं कर पाएगी और रसातल में चली जाएगी। यह सुनकर भागीरथ सोच में पड़ गए। गंगा को यह अभिमान था कि कोई उसका वेग सहन नहीं कर सकता। तब उन्होंने भगवान भोलेनाथ की उपासना शुरू कर दी। शिव ने गंगा का गर्व दूर करने के लिए, संसार के दुखों को हरने के लिए शिव शम्भू प्रसन्न हुए और भागीरथ से वर मांगने को कहा। भागीरथ ने अपना सब मनोरथ उनसे कह दिया। गंगा जैसे ही स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरने लगीं शिव ने उन्हें जटाओं में कैद कर लिया। वह छटपटाने लगी और शिव से माफी मांगी। तब शिव...