रावण जैसा महाज्ञानी दूसरा कोई नहीं;
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रावण जैसा महाज्ञानी दूसरा कोई नहीं;पढ़िए रावण की अच्छाइयां जिसको शायद कोई न जानता हो..!!!
नवरात्री के 9 दिनों के बाद 10वें दिन विजयादशमी का पर्व आता है जिस दिन भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी आज जिस रावण को हम बुराई की नजर से देखती है उनके जैसा महँ ज्ञानी कोई नहीं होगा उनके अंदर कुछ अच्छी बातें भी थी जिसके प्रमाण हमको शास्त्रों में मिलते है। लंकापति रावण एक पंडित के पुत्र थे इसलिए वे चारों वेदों का ज्ञान रखते थे और महापंडित भी कहलाते थे ।

आइये अब जानते है रावण की कुछ अच्छाइयाँ जिनसे शायद आप भी अनजान हो ।
- रावण अहंकारी थे और उनको समस्त लोको पर अपनी सत्ता जमानी थी लेकिन वे सबसे बड़ा शिवभक्त भी थे । उस समय में भगवान शिव का कोई सच्चा भक्त था तो वह सिर्फ रावण क्योंकि आज हम जो शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करते है वह रावण की ही देन है।
- बता दें जब श्री राम वानरों के साथ लंका विजय के लिए निकले तभी रामेश्वरम में उनको विजय यज्ञ करना था जिसके लिए देवताओं के गुरु बृहस्पति को निमंत्रण दिया गया लेकिन वे आने में असमर्थ थे इसलिए श्री राम ने सुग्रीव से कहा कि – लंकापति रावण को बुलाओ क्योंकि रावण धर्म से बाहृमण था। राम के बुलावे पर रावण यज्ञ में पुष्पक विमान के साथ पहुंचे और यज्ञ को सम्पन्न करवाया था उसके बाद राम को विजय होने का आशीर्वाद भी दिया था। जब लोगों ने आश्चर्य से रावण को पूछा कि आपने राम को विजय होने का आशीर्वाद क्यों दिया? रावण ने कहा कि यह आशीर्वाद लंकापति रावण ने नहीं बल्कि महापंडित रावण ने दिया है।

- महानपंडित रावण माता सीता का अपहरण कर लंका ले तो गए लेकिन उन्होंने माता सीता को महल में रखने के बजाए अशोकवाटिका में रखा था तथा कभी माता सीता को छुआ तक नहीं था।
- राजनीती के महापंडित रावण जानते थे कि उसकी मृत्यु श्री राम के हाथों होने वाली है। जब रावण युद्ध मृत्युशैया पर थे तब श्री राम लक्ष्मण को रावण के पास राजनीती का ज्ञान लेने भेजते है। उस समय रावण लक्ष्मण को गुप्त रहस्य बताते है।
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