जलेश्वर महादेव; अद्भुत है भगवान शिव का 5000 वर्ष पुराना अस्तित्व का प्रतीक...!!! |

जलेश्वर महादेव; अद्भुत है भगवान शिव का 5000 वर्ष पुराना अस्तित्व का प्रतीक...!!! | babamahakaal

भारतीय पौराणिक कथा(Indian Mythological Stories)

हिन्दू धर्म में बहुत से देवी देवता हैं जिनमें से ब्रम्हा(Brahma), विष्णु(Vishnu) और महेश(Mahesh) प्रमुख हैं। इन सभी देवताओं का अपना अलग-अलग महत्व है। जिसमें महादेव(Mahadev) को कई नामों से जाना जाता है एक नाम इनका महाकाल(Mahakaal) भी है। जिसके कारण इन्हें विनाश का देवता भी माना जाता है।

महादेव
महादेव

भगवान शिव(Shiv) को देवों का देव माना जाता है, वे सृष्टि के निर्माण के समय प्रकट हुए थे। भगवान शिव(Shiv) का ध्यान करने से ही एक ऐसी छवि उभरती है जिसमें वैराग है।

महादेव(Mahadev) के हाथ में त्रिशूल, वहीं दूसरे हाथ में डमरु, गले में सांप और सिर पर त्रिपुंड चंदन लगा हुआ है। भगवान शिव(Shiv) सभी बुराइयों का अंत करके पुनः नवनिर्माण करते हैं।वे अपने क्रोध के कारण विनाशकारी भी माने जाते हैं ।लेकिन वो नवनिर्माण के देवता माने जाते हैं। सभी देवों के ऊपर उन्हें माना जाता है। बुराई की वृद्धि होती है वो पूरी सृष्टि समाप्त कर देते हैं जिससे नए युग का प्रारंभ हो सके।

जलेश्वर महादेव

पौराणिक कहानी(Mythological Story)

भगवान शिव(Shiv) को भोलेनाथ(Bholenath) इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो अपने भक्तों से बहुत जल्द प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांच्छित फल देते हैं। उन्हीं भक्तों के विश्वास के लिए और शिव के अस्तित्व का परिचायक गुजरात के मंदिर में 5000 साल पुराना

शिवलिंग(Shivling) स्थापित किया गया है। भगवान शिव(Shiv) के ऐसे तो भारत में बहुत से मंदिर हैं। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के विषय में बताने वाले हैं जो भगवान शिव(Shiv) के अस्तित्व का प्रतीक माना जाता है। इस मंदिर को जलेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

जलेश्वर महादेव मंदिर

यह मंदिर(Mandir) पूरना नदी के तट पर होने के कारण इस मंदिर को जलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। यहां पर पूरना नदी पूर्व दिशा की और प्रवाहित होती है। इसलिए इस नदी को पूर्वा नदी भी कहते हैं। यह मंदिर गुजरात के नर्मदा(Narmada) जिले के पास देडियापाडा तहसील के पास कोकम गांव में स्थित है। इस मंदिर के शिवलिंग का इतिहास 5000 वर्ष पुराना है।

कहते हैं 1940 में यह मंदिर खुदाई करते समय मिला था। इस मंदिर के साथ और भी कई चीजें खुदाई में मिली थीं।प्रत्येक महाशिवरात्रि(Shivratri) को जलेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा की जाती है । हर सोमवार(Monday) यहां भक्तों की भीड़ जमा होती

भोलेनाथ
भोलेनाथ

है जो जलेश्वर महादेव(Mahadev) मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए एकत्र होती है। इस मंदिर का इतिहास इतना पुराना होने के बाद भी बहुत से लोगों की इस मंदिर के विषय में ज्यादा जानकारी नहीं है। इसी कारण से कम ही लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं।

॥ जय जलेश्वर महादेव ॥

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