त्रिपुण्ड्र
त्रिपुण्ड्र
त्रिपुण्ड्र | |
| विवरण | 'त्रिपुण्ड्र' शैव अनुयायियों द्वारा धारण किया जाने वाला धार्मिक चिह्न है। 'शिवमहापुराण' के अनुसार त्रिपुण्ड्र की तीन रेखाओं में से हर एक में नौ-नौ देवतानिवास करते हैं। |
| सम्प्रदाय | शैव सम्प्रदाय |
| सम्बंधित देव | शिव |
| धारण स्थान | त्रिपुण्ड्र का चिह्न ललाट के अतिरिक्त छाती, भुजाओं एवं शरीर के अन्य भागों पर भी अंकित किया जाता है। |
| विशेष | त्रिपुण्ड्र की तीनों रेखाएँ भगवान शिव के रूप को दर्शाती हैं तथा हर एक रेखा में देवताओं का वास है। यह 'ॐ' का स्वरूप हैं। |
| संबंधित लेख | शैव सम्प्रदाय, शिव |
| अन्य जानकारी | भस्म या चंदन से त्रिपुण्ड्र की तीन रेखाएं बनाई जाती हैं। भस्म या चंदन को हाथ के बीच की तीन अंगुलियों से लेकर सावधानीपूर्वक माथे पर तीन तिरछी रेखाओं जैसा आकार दिया जाता है। |
त्रिपुण्ड्र (अंग्रेज़ी: Tripundra) अथवा 'त्रिपुण्ड' 'शैव संप्रदाय' का धार्मिक चिह्न है, जो भौंहों के समानांतर ललाट के एक सिरे से दूसरे तक भस्म की तीन रेखाओं से अंकित होता है। त्रिपुण्ड्र का चिह्न छाती, भुजाओं एवं शरीर के अन्य भागों पर भी अंकित किया जाता है। 'कालाग्निरुद्रोपनिषद' में त्रिपुण्ड्र पर ध्यान केंद्रित करने की रहस्यमय क्रिया का वर्णन है। यह सांकेतिक चिह्न शाक्तोंद्वारा भी अपनाया गया है। यह शिव एवं शक्ति के एकत्व (सायुज्य) का निर्देशक है।[1]
देवताओं का निवास
ललाट अर्थात् माथे पर भस्म या चंदन से तीन रेखाएं बनाई जाती हैं, उसे त्रिपुण्ड्र कहते हैं। भस्म या चंदन को हाथों की बीच की तीन अंगुलियों से लेकर सावधानीपूर्वक माथे पर तीन तिरछी रेखाओं जैसा आकार दिया जाता है। 'शैव संप्रदाय' के लोग इसे धारण करते हैं। 'शिवमहापुराण' के अनुसार त्रिपुंड की तीन रेखाओं में से हर एक में नौ-नौ देवता निवास करते हैं। इनके नाम इस प्रकार हैं[2]-
- पहली रेखा के देवता
अकार, गार्हपत्य अग्नि, पृथ्वी, धर्म, रजोगुण, ऋग्वेद, क्रिया शक्ति, प्रात:स्वन, महादेव
- दूसरी रेखा के देवता
ऊंकार, दक्षिणाग्नि, आकाश, सत्वगुण, यजुर्वेद, मध्यंदिनसवन, इच्छाशक्ति, अंतरात्मा, महेश्वर
- तीसरी रेखा के देवता
मकार, आहवनीय अग्नि, परमात्मा, तमोगुण, द्युलोक, ज्ञानशक्ति, सामवेद, तृतीयसवन, शिव
टीका टिप्पणी और संदर्भ
- ↑ हिन्दू धर्मकोश |लेखक: डॉ. राजबली पाण्डेय |प्रकाशक: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान |पृष्ठ संख्या:305 |
- ↑ 2.0 2.1 2.2 कहाँ, कैसे और क्यों धारण करें त्रिपुण्ड्र (हिन्दी) ajabgjab.com। अभिगमन तिथि: 20 मई, 2016।
- ↑ त्रिपुण्ड्र महत्त्व (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 20 दिसम्बर, 2012।
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