एक ऐसा मँदिर जहां होती है शिव के मुख की पूजा जबकि बाकी के शरीर की पूजा होती है नेपाल मे !!!

एक ऐसा मँदिर जहां होती है शिव के मुख की पूजा जबकि बाकी के शरीर की पूजा होती है नेपाल मे !!!

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा। हर राज्य के छोटे- छोटे क्षेत्रों में थोड़ी-थोड़ी दूर पर या फिर यूँ कहें कि हर 5 आदमी पर एक मंदिर स्थापित हैं ही। खैर ये तो रही व्यंग्य की बात, जो मूलतः कहीं न कहीं भारत की धार्मिक विश्वास से जुड़ी सच्चाई से वाकिफ कराती है। हर मंदिरों को किसी न किसी कहानी व आश्चर्य से भी खूब अच्छी तरह जोड़ा गया है।
एक ऐसा मँदिर जहां होती है शिव के मुख की पूजा जबकि बाकी के शरीर की पूजा होती है नेपाल मे !!!
एक ऐसा मँदिर जहां होती है शिव के मुख की पूजा जबकि बाकी के शरीर की पूजा होती है नेपाल मे !!!
इन्हीं धार्मिक स्थलों व असामान्य मंदिरों में से एक है, उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थापित रुद्रनाथ का मंदिर। रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित धार्मिक स्थल है, जो पंचकेदारों में से एक केदार कहलाता है। समुद्रतल से 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर भव्य प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण है। इस मंदिर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि, इस मंदिर में भगवान शिव जी के एकानन, यानि कि मुख की पूजा होती है। इनके अन्य, बाकि बचे सम्पूर्ण शरीर की पूजा भारत के पड़ोसी देश नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में की जाती है।

आपने भारत के कई ऐसे मंदिरों के दर्शन किये होंगे, जो भगवान शिव जी को समर्पित हैं, और वहां उनके लिंग की पूजा की जाती है। पर केवल उनके मुख की पूजा, शायद ही कहीं की जाती है और मंदिर से जुड़ा यही अद्वितीय तथ्य इस मंदिर को सबसे अलग और रोचक बनाता है। यहाँ पूजे जाने वाले शिव जी के मुख को ‘नीलकंठ महादेव’ कहते हैं।

इस स्थान की यात्रा के लिए सबसे पहले गोपेश्वर पहुंचना होता है जो कि चमोली जिले का मुख्यालय है। गोपेश्वर एक आकर्षक हिल स्टेशन है जहां पर ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर है। इस मंदिर का ऐतिहासिक लौह त्रिशूल भी आकर्षण का केंद्र है। गोपेश्वर पहुंचने वाले यात्री गोपीनाथ मंदिर और लौह त्रिशूल के दर्शन करना नहीं भूलते। गोपेश्वर से करीब पांच किलोमीटर दूर है सगर गांव। बस द्वारा रुद्रनाथ यात्रा का यही अंतिम पडाव है। इसके बाद जिस दुरूह चढाई से यात्रियों और सैलानियों का सामना होता है वो अकल्पनीय है।

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